Monday, May 18, 2009
कभी.......जी चाहता है!
कभी अपनी हंसी पे भी आता है गुस्सा,
कभी सबको हँसाने को जी चाहता है!
कभी छुपा लेते हैं सब ग़मों को किसी कोने में,
कभी किसी को सब कुछ सुनाने को जी चाहता है!
कभी रोता नहीं मन किसी कीमत पे भी,
कभी यूँ ही आंसू बहाने को जी चाहता है!
कभी उड़ना चाहता है मन ऊँचे आकाश में,
कभी किसी बंधन में बंध जाने को जी चाहता है!
कभी सागर की लहरों से भी नहीं डरता ये दिल,
कभी उन्हीं लहरों में समां जाने को जी चाहता है!
कभी लगते हैं अपने बेगानों से,
कभी बेगानों को भी अपना बनाने को जी चाहता है!
कभी शर्म नहीं आती गैरों से भी,
कभी यूँ ही शर्माने को जी चाहता है!
कभी मिलता नहीं अपनों से ये दिल,
कभी किसी अनजाने से मिल जाने को दिल चाहता है!
कभी आता नहीं जुबाँ पर ऊपर वाले का नाम,
कभी उसको भी मनाने को जी चाहता है!
कभी लगती है ये जिंदगी बड़ी सुहानी,
कभी जिंदगी का साथ छोड़ जाने को जी चाहता है!!!!
कभी सबको हँसाने को जी चाहता है!
कभी छुपा लेते हैं सब ग़मों को किसी कोने में,
कभी किसी को सब कुछ सुनाने को जी चाहता है!
कभी रोता नहीं मन किसी कीमत पे भी,
कभी यूँ ही आंसू बहाने को जी चाहता है!
कभी उड़ना चाहता है मन ऊँचे आकाश में,
कभी किसी बंधन में बंध जाने को जी चाहता है!
कभी सागर की लहरों से भी नहीं डरता ये दिल,
कभी उन्हीं लहरों में समां जाने को जी चाहता है!
कभी लगते हैं अपने बेगानों से,
कभी बेगानों को भी अपना बनाने को जी चाहता है!
कभी शर्म नहीं आती गैरों से भी,
कभी यूँ ही शर्माने को जी चाहता है!
कभी मिलता नहीं अपनों से ये दिल,
कभी किसी अनजाने से मिल जाने को दिल चाहता है!
कभी आता नहीं जुबाँ पर ऊपर वाले का नाम,
कभी उसको भी मनाने को जी चाहता है!
कभी लगती है ये जिंदगी बड़ी सुहानी,
कभी जिंदगी का साथ छोड़ जाने को जी चाहता है!!!!
Thursday, May 14, 2009
Ek Nishani hoon main
अगर रख सको तो एक निशानी हूँ मैं,
खो दो तो सिर्फ एक कहानी हूँ मैं,
रोक पाए न जिसको ये सारी दुनिया,
वो एक बूँद आँख का पानी हूँ मैं,
सबको प्यार देने की आदत है हमें,
अपनी अलग पहचान बनाने की आदत है हमे,
कितना भी गहरा जख्म दे कोई,
उतना ही ज्यादा मुस्कराने की आदत है हमें,
इस अजनबी दुनिया में अकेला ख्वाब हूँ मैं,
सवालो से खफा छोटा सा जवाब हूँ मैं,
जो समझ न सके मुझे उनके लिए "कौन",
जो समझ गए उनके लिए खुली किताब हूँ मैं,
आँख से देखोगे तो खुश पाओगे,
दिल से पूछोगे तो दर्द का सैलाब हूँ मैं,
"अगर रख सको तो निशानी खो दो तो सिर्फ एक कहानी हूँ मैं" !!!
Wednesday, May 13, 2009
किसी को मेरी मौत पे
किताबो के पन्नो को पलट के सोचता हु,,,
यु पलट जाये मेरी ज़िन्दगी तो क्या बात है...
ख्वाबो में रोज़ मिलता है जो,,,
हकीकत में आये तो क्या बात है...
कुछ मतलब के लिए दूंदते है मुझको,,,
बिन मतलब जो आये तो क्या बात है...
कत्ल कर के तो सब ले जायेंगे दिल मेरा..
कोई बातो से ले जाए तो क्या बात है...
शरीफों की शराफत में जो बात न हो...
एक शराबी कह जाये तो क्या बात है...
अपने रहने तक तो ख़ुशी दूंगा सबको..
किसी को मेरी मौत पे ख़ुशी मिल जाये तो क्या बात है...
Tuesday, May 12, 2009
Tere Mere
Nai nai si lagti hain ye zindagi tere aane ke baad.
Gham judai ka khatm kar dega hume tere jaane ke baad.
Har kami ganwara hain sanam, gar saath ho tumhara.
Jaane anjaane ban gaye ho tum jine ka sahara.
Teri yaadon mein doobe huan hain ab subho shaam mere.
Neend to jaati rahi, ab mere khwab bhi ho gaye hain tere.
Zulfo ko raat, chehre ko chaand jab se keh gaye ho tum,
bheed mein sab se juda aur haseen mujhe bana gaye ho tum.
Yaadon se teri behalta nahi ab dil ye mera.
Sach ho jaaye sapna mera
wo hote agar
Woh hote Agar.....
Woh hote koi kali jo khil jate,
Aur hum unki mahek ban jate.
woh Hote Agar.........
Woh hote koi sahil to,
Hum kinara ban ke unki bahoen main sojate.
woh Hote Agar.........
Woh hote agar chaand to,
Hum unki chandni ban ke
unke khali jahaen main beshumar mohabbat latey.
woh Hote Agar.........
Woh hote agar suraj to ,
Hum unki kirne ban ke unki zindagi mai ujala late.
woh Hote Agar.........
Woh hote agar paedd to,
Hum unke pattae ban jate aur naya phal khilate.
Magar ye to hain sab batien,
Agar hum hi na hote to,
Ise kaoun nibhate.
Friday, May 1, 2009
Kyu नज़र आता Hai
हजारों रंगों की दुनिया,
पर हर रंग काला क्यों नजर आता है ?
हर सुन्दर चेहरे पर है मुस्कराहट,
पर हर मुस्कराहट में कमी क्यों नजर आता है ?
छोटा बहुत है ये ज़िन्दगी का सफ़र,
पर हर सफ़र लम्बा क्यों नजर आता है ?
बहुत ऊँचा है मेरे सपनों का महल,
पर दिवार टुटा हुआ क्यों नजर आता है ?
रिश्तों में खोना चाहते हैं मगर,
हर रिश्ते में धोखा क्यों नजर आता है ?
इन्सान तो हम हैं मगर,
हर खून में मिलावट क्यों नजर आता है ?????
पर हर रंग काला क्यों नजर आता है ?
हर सुन्दर चेहरे पर है मुस्कराहट,
पर हर मुस्कराहट में कमी क्यों नजर आता है ?
छोटा बहुत है ये ज़िन्दगी का सफ़र,
पर हर सफ़र लम्बा क्यों नजर आता है ?
बहुत ऊँचा है मेरे सपनों का महल,
पर दिवार टुटा हुआ क्यों नजर आता है ?
रिश्तों में खोना चाहते हैं मगर,
हर रिश्ते में धोखा क्यों नजर आता है ?
इन्सान तो हम हैं मगर,
हर खून में मिलावट क्यों नजर आता है ?????
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