याद आते हो तुम ....
मत पूछो ये मुझसे की कब याद आते हो तुम,
जब जब साँसें चलती हैं बहुत याद आते हो तुम,
नींद में पलकें होती हैं जब भी भारी,
बनके ख्वाब बार बार नज़र आते हो तुम,
महफिल में शामिल होते हैं हम जब भी,
भीड़ की तनहयों में हर बार नज़र आते हो तुम,
जब भी सोचा की फासला रखूँ मैं तुम से,
ज़िन्दगी बन के साँसों में समां जाते हो तुम,
खुद को तूफ़ान बनाने की कोशिश तो की,
बन के साहिल अपनी आगोश में समां जाते हो तुम,
चाहा ना था मैंने इस पहेली में उलझना,
हर उलझन का जवाब बन के उभर आते हो तुम,
सूरज की रौशनी, चंदा की चांदनी,
आसमान को देखता हूँ मैं जब जब,
तुम्हारी कसम बहुत याद आते हो तुम,
अब ना पूछना मुझसे की कब,
याद आते हो तुम .........
जब जब साँसें चलती हैं बहुत याद आते हो तुम,
नींद में पलकें होती हैं जब भी भारी,
बनके ख्वाब बार बार नज़र आते हो तुम,
महफिल में शामिल होते हैं हम जब भी,
भीड़ की तनहयों में हर बार नज़र आते हो तुम,
जब भी सोचा की फासला रखूँ मैं तुम से,
ज़िन्दगी बन के साँसों में समां जाते हो तुम,
खुद को तूफ़ान बनाने की कोशिश तो की,
बन के साहिल अपनी आगोश में समां जाते हो तुम,
चाहा ना था मैंने इस पहेली में उलझना,
हर उलझन का जवाब बन के उभर आते हो तुम,
सूरज की रौशनी, चंदा की चांदनी,
आसमान को देखता हूँ मैं जब जब,
तुम्हारी कसम बहुत याद आते हो तुम,
अब ना पूछना मुझसे की कब,
याद आते हो तुम .........

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