Sunday, May 16, 2010
किसी और से nahi
जो बात तुमसे है किसी और से नहीं
मेरी ख़ुशी तुमसे है किसी और से
आज़ाद पंछी की तरह चहकती हूँ पास जब तुम होते हो
ये चहक भी तुसे है किसी और से नहीं
दुआएं भी मांगती हूँ सिर्फ तेरे लिए
ये दुआएं भी तुमसे है किसी और से नाहीं
याद में तेरे ये आंखे भी नम होते है
की यादूं क झरोखे भी तुमसे है किसी और से
मिलने क लिए तरपता है ये दिल
की ये ताराप भी तुमसे है किसी और से नहीं
मेरी मजबूरी को समझाना है, जानना है तुमको
किसी और को नहीं, किसी और को नहीं।
आओ तो सही
सर्द मौसम में गर्म चादर की तरह
तुम्हारी यादों को लपेट कर,
इंतज़ार में हूं
तुम आओ तो सही
तुम्हेदिखाओ उन सपनो को जो तुम्हारे याद में बुने है
उन लम्हों को जो चुन चुन कर अस्को पे सजाये है
उन सुनहरी भरी बातों को जो सिर्फ आइने को ही सुनाई है
उस दर्द को जो कब से अपने अन्दर समेटा है
तुम आओ तो सही बहुत कुछ दिखाना है
बस उन्हें महसूस करने तो आओ आओ तो सही, बस एक बार आओ तो सही।
तुम्हारी यादों को लपेट कर,
इंतज़ार में हूं
तुम आओ तो सही
तुम्हेदिखाओ उन सपनो को जो तुम्हारे याद में बुने है
उन लम्हों को जो चुन चुन कर अस्को पे सजाये है
उन सुनहरी भरी बातों को जो सिर्फ आइने को ही सुनाई है
उस दर्द को जो कब से अपने अन्दर समेटा है
तुम आओ तो सही बहुत कुछ दिखाना है
बस उन्हें महसूस करने तो आओ आओ तो सही, बस एक बार आओ तो सही।
Subscribe to:
Comments (Atom)
