सर्द मौसम में गर्म चादर की तरह
तुम्हारी यादों को लपेट कर,
इंतज़ार में हूं
तुम आओ तो सही
तुम्हेदिखाओ उन सपनो को जो तुम्हारे याद में बुने है
उन लम्हों को जो चुन चुन कर अस्को पे सजाये है
उन सुनहरी भरी बातों को जो सिर्फ आइने को ही सुनाई है
उस दर्द को जो कब से अपने अन्दर समेटा है
तुम आओ तो सही बहुत कुछ दिखाना है
बस उन्हें महसूस करने तो आओ आओ तो सही, बस एक बार आओ तो सही।
Subscribe to:
Post Comments (Atom)

No comments:
Post a Comment