बिन तेरे ये ज़िन्धी अधूरी थी,
तेरे साथ न होना मेरी मज़बूरी थी,
हो कर भी पास तू दूर था मुझे से,
जाने ये कैसे दुरी थी,
आना चाह्ती थी मैं पास तेरे ,
पर जाने क्यों इतना डरती थी,
दूर से देख तुझे यू ,धीरे से सजदा करती थी,
मोहब्बत में मैं भी तेरी ,पल-पल आहे भारती थी,
छिप -छिप कर मैं भी तुमसे ,मिलने की कोशिस करती थी........
तेरे साथ न होना मेरी मज़बूरी थी,
हो कर भी पास तू दूर था मुझे से,
जाने ये कैसे दुरी थी,
आना चाह्ती थी मैं पास तेरे ,
पर जाने क्यों इतना डरती थी,
दूर से देख तुझे यू ,धीरे से सजदा करती थी,
मोहब्बत में मैं भी तेरी ,पल-पल आहे भारती थी,
छिप -छिप कर मैं भी तुमसे ,मिलने की कोशिस करती थी........

http://www.uniqueidea.net/Love-poems_5.html
ReplyDeleteबहुत खूब...
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